एपिसोड 19 ज़ोया का डर और शोहर का सायाज़ोया की आँखें धीरे से खुलीं। कमरे के बाहर से आ रही भारी जूतों की आवाज़ और कमांडोज़ की गूँज ने उसे बेचैन कर दिया। वह कमज़ोर थी, पर उसका दिल अज़ीम के लिए धड़क रहा था।ज़ोया की घबराहट:"अज़ीम... ज़ारा आपा..." ज़ोया ने लड़खड़ाती आवाज़ में पुकारा। उसे लगा कि शायद उसके पिता ने अज़ीम को धक्के मारकर बाहर निकाल दिया है। वह बेड से उठने की कोशिश करने लगी, उसकी साँसें तेज़ हो गईं। "कोई है? क्या हुआ है बाहर? अज़ीम कहाँ है?"उसी वक्त दरवाज़ा खुला और ज़ारा अंदर दाखिल हुई।