छाया की परछाई

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"कहानी-छाया की परछाइयांरिजल्ट देख कर कुमार ने राहत की सांस ली ।वह प्रथम श्रेणी में नहीं आया था फिर भी स्नातकोत्तर छात्रों में उसका दूसरा नाम था और वह भी इस कारण की महानगर की इस कॉलेज में उसने किसी को भी अपनी वास्तविक जाती नहीं बताई थी। क्योंकि वह इंटर कॉलेज और कॉलेज में अपने कस्बे में अपनी वास्तविक जाति बताने के कारण बड़ा अपमानित हुआ था। वह देख रहा है कि उसके पिता के साथ तो लोग जाति सूचक शब्दों के साथ मारपीट और गाली गुप्तार करते थे। लेकिन अब वह नौबत नहीं आती हां भीतर ही भीतर