जरा संभल केकमल चोपड़ासजग की मौसी की लड़की की शादी थी। शादी में शामिल होने के लिये उसके बाबूजी को लखनऊ जाना था। पर दो दिन पहले बाबूजी बीमार हो गये। समस्या बन गई कि शादी में कौन जाये? माँ बाबूजी की देखभाल में लगी हुई थी। वह भी नहीं जा सकती थी। अंत में फैसला हुआ कि सजग अकेला ही लखनऊ चला जाये और शादी का रौनक मेला देख आये। सजग भी खुशी-खुशी लखनऊ जाने के लिये तैयार हो गया।शादी में शामिल होकर सजग को बहुत अच्छा लग रहा था। भव्य पंडाल, साज-सजावट, तरह-तरह के पकवान और इधर-उधर मौज-मस्ती