सभ्यता और युद्ध

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मानवीय सभ्यता और युद्ध विवेक रंजन श्रीवास्तव भोपाल मानवीय सभ्यता की कहानी वास्तव में मनुष्य की जिजीविषा और उसके संघर्षों की एक लंबी दास्तान है।सभ्यता सामाजिक नियमों का परिपालन चाहती है, इन मान्य प्रचलित नियमों की अवहेलना युद्ध की जन्मदात्री बनती है। संपत्ति, संसाधन , स्त्री , या जमीन के लिए युगों से युद्ध होते रहे हैं। हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो पाते हैं कि विकास और विनाश सिक्के के दो पहलू रहे हैं। सभ्यता का अर्थ अगर सुसंस्कृत होना है तो युद्ध उसी संस्कृति का एक काला अध्याय है। आदिम युग में जब मनुष्य वनों में रहता था तब उसकी लड़ाई केवल