बच्चा-बच्चा बना सिपाही कमल चोपड़ाहर तरफ सजग के साहस और बुद्धिमानी-समझदारी की प्रशंसा हो रही थी। स्कूल के अध्यापक, उसके सहपाठी, गली-मुहल्लेवाले सभी उसे बधाइयाँ दे रहे थे। वे लड़के जो उसे पहले चिढ़ाते थे, शर्मिंदा थे और अब वे भी उसकी प्रशंसा कर रहे थे। प्रिंसिपल ने भी आकर उसे शाबाशी दी और सम्मानित किया। सजग की आँखें भीग गई थीं। वह बोला, "इस सम्मान की हकदार तो दीदी हैं। वो मुझे इस सबके लिये प्रोत्साहित न करतीं तो यह संभव नहीं था।"स्कूल से छुट्टी मिलने के बाद स्कूल के तीन-चार लड़कों ने उसे रोका और उसकी प्रशंसा करते