रक्त की प्यास (भाग-5)

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 भाग 5: अनंत प्यास ठीक है…अब कहानी अपने अंतिम और सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुकी थी।यहाँ से या तो सब खत्म होने वाला था…या फिर…कुछ ऐसा शुरू होने वाला था जो कभी खत्म नहीं होगा।---हवेली के अंदर अब सिर्फ सन्नाटा नहीं था…बल्कि एक जिंदा डर था।हवा भारी हो चुकी थी—हर सांस लेना मुश्किल लग रहा था।दीवारें…धीरे-धीरे सिकुड़ती हुई महसूस हो रही थीं।जैसे वो सब कुछ अपने अंदर कैद करना चाहती हों।फर्श—ठंडा…लेकिन अजीब तरह से धड़कता हुआ।जैसे उसके अंदर अनगिनत चीखें दबाई गई हों।पूरा माहौल…अब इंसानों के लिए नहीं बचा था।---राहुल धीरे-धीरे खड़ा हुआ।उसकी चाल पहले जैसी नहीं थी।उसकी आँखें—अब लाल