भाग 3: खून की विरासत (Extended Version)अंधेरा…सिर्फ अंधेरा नहीं…जैसे कोई जिंदा चीज़ हो, जो धीरे-धीरे राहुल को अपने अंदर निगल रही हो।हवेली की दीवारें ठंडी हो चुकी थीं।हवा में नमी थी… और एक अजीब सी सड़न की गंध।राहुल के चारों तरफ सन्नाटा फैला हुआ था।इतना गहरा सन्नाटा कि उसकी अपनी सांसों की आवाज भी उसे अजनबी लगने लगी।उसने हिलने की कोशिश की…लेकिन उसका शरीर जैसे जम गया था।तभी—एक ठंडी हवा का झोंका उसके चेहरे से टकराया।उसकी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई।और उसी पल—लाइट अपने आप जल उठी।राहुल की आँखें चौंधिया गईं।उसने धीरे-धीरे सामने देखा…और उसका दिल रुक सा गया।वो औरत…वहीं