भाग 2: कुएँ का रहस्यसुबह की रोशनी हवेली के अंदर घुस तो रही थी…लेकिन अंधेरा पूरी तरह हट नहीं रहा था।जैसे हवेली के किसी कोने में अभी भी रात छिपी हो।राहुल की नींद टूट चुकी थी।विक्रम का चेहरा पीला पड़ गया था।“राहुल…” उसकी आवाज कांप रही थी,“ये जगह ठीक नहीं है… हमें यहाँ से निकलना चाहिए।”राहुल ने उसकी तरफ देखा।“तू ठीक है?”विक्रम ने अपना गला छुआ।“मुझे लगा… कोई मुझे छू रहा था… बहुत ठंडी उंगलियाँ…”राहुल ने गले के निशान देखे।“ये सिर्फ… एक सपना था।”लेकिन अंदर ही अंदर, उसे भी शक होने लगा था।---हवेली के भीतर खोजराहुल ने फैसला किया—वो इस