------------------शाम होने को आई थी । आज का दिन काफी भारी बिता था । वो हॉस्टल से बाहर निकली और जंगल की तरफ बड गई। उसका बंद दिवार के बीच रहने का मन नही था । आज अमोघ को उसकी नासमझी या गलती का एहसास कराया था चारू ने ! अमोघ ने उस से माफी भी मांगी थी । लेकिन वो! वो तो बस सर हिलाकर वहां से चली गई। वो अभी जंगल के अंदर कदम रखती की पीछे से उसे किसी ने पुकारा । वो आवाज भारी थी , गंभीर थी लेकिन उसके लिए चिंता और प्रेम से भरी थी