सन 1923 की बात है। उत्तर भारत के एक छोटे से गाँव भैरवपुर में लोग सूरज ढलते ही अपने दरवाजे बंद कर लेते थे। उस गाँव के बाहर एक पुराना कब्रिस्तान था, जिसके बारे में कहा जाता था कि वहाँ दफन एक लाश जिंदा हो चुकी है। लोग उसे “खूनी मुर्दा” कहते थे। कोई उसे देख नहीं पाया था, लेकिन हर अमावस्या की रात किसी न किसी के गायब होने की खबर जरूर मिलती थी।गाँव में एक नौजवान था, नाम था रघु। वह इन बातों पर यकीन नहीं करता था। उसे लगता था कि यह सब डर फैलाने की बातें