बारिश का मौसम था। और बारिश भी ऐसी जो बस गिरती नहीं थी। बल्कि छत पर बैठकर कान के अंदर तक उतर जाती थी। जैसे कोई दूर खड़ा आदमी लगातार किसी टूटे हुए गाने को बुदबुदा रहा हो।सुमित ने अपनी पुरानी जीप को सड़क के किनारे रोका और शीशा नीचे किया। सामने घने पेड़ों के बीच एक लोहे का टूटा हुआ गेट खड़ा था। उसके ऊपर जंग लगी हुई पट्टी पर लिखा था।रानीपुर स्वागत करता है।लेकिन स्वागत जैसा कुछ नहीं था वहाँ। बस सन्नाटा था। इतना भारी सन्नाटा कि सुमित को लगा अगर वह तेज सांस लेगा तो किसी को