एपिसोड 18: सच की कड़वाहट और अहंकार का वारअस्पताल के वेटिंग एरिया में रात का सन्नाटा गहरा गया था। ज़ोया सो रही थी। ज़ारा और अज़ीम खिड़की के पास खड़े बाहर की धुंधली रोशनी को देख रहे थे। ज़ारा की आँखों में एक अजीब सी नरमी थी।ज़ारा और अज़ीम की बातचीत:"अज़ीम," ज़ारा ने धीरे से पूछा, "ज़ोया जैसी चंचल और ज़िद्दी लड़की तुम्हें कैसे पसंद आ गई? और उसे तुममें ऐसा क्या दिखा कि उसने अपनी जान तक की परवाह नहीं की?"अज़ीम मुस्कुराया, एक सादगी भरी मुस्कान। "मैम, पसंद आने के लिए वज़ह की ज़रूरत नहीं होती। वह पहली बार