रात इतनी गहरी थी कि जैसे अंधेरा खुद सांस ले रहा हो। हवा में एक अजीब सी ठंडक थी और मंदिर के टूटे हुए खंडहरों के बीच खड़े उस पीपल के पेड़ की परछाईं जमीन पर किसी विकृत आकृति की तरह हिल रही थी। कहते हैं, उस जगह पर कभी एक महान विद्वान ब्राह्मण रहता था, जिसकी मृत्यु के बाद उसकी आत्मा शांति नहीं पा सकी। लोग उसे अब ब्रह्मराक्षस कहते हैं। और उस रात, मैं उसी के ठिकाने पर खड़ा था।यह घटना उस समय की है जब गाँवों में बिजली नहीं होती थी और रात होते ही हर कोई अपने