Shondhokata - The Headless Ghost

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रात का वह पहर था जब हवा भी जैसे सांस रोककर खड़ी हो जाती है। पुराने रेल की पटरियों के पास बसे उस सुनसान गांव में लोग सूरज ढलते ही अपने दरवाजे बंद कर लेते थे। कहते थे कि आधी रात के बाद यहां कोई चलता है। कोई ऐसा जो इंसान नहीं है। और अगर किसी ने उसे देख लिया तो वह सुबह तक जिंदा नहीं बचता।मैं उस गांव में पहली बार गया था। मेरे दादा का पुराना घर वहीं था और उनकी मौत के बाद मुझे कुछ कागजात लेने वहां जाना पड़ा। गांव वालों ने मुझे चेतावनी दी थी