मैं भी चेतन

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                     बहुत मुश्किल में डाल दिया है तुमने |.. आज क्या मुझे अपनी चुप्पी तोडनी ही होगी ?.. नहीं, छोड़ो भी |एक मेरे बोलने या ना बोलने से तुम तथाकथित बुद्धिजीवियों, कलाकारों, नर्तकों,लेखकों और कवियों पर क्या कोई फ़र्क  पड़ेगा ?                     लेकिन, कुछ तो पड़ेगा |सबसे ज्यादा फ़र्क  तो ऐसी मान्यता रखने वाले भौतिक शास्त्रियों को पड़ेगा जो मुझको   जड़ मानते हैं |उनका कहना है कि “मैं मात्र एक मेटेरियल हूँ और कुछ नहीं |” उनका कहना है कि” तुम देख नहीं सकते ,तुम सुन नहीं सकते , तुम बोल  भी नहीं सकते | तुममे कोई