Honted Jobplace - 3

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कुछ देर बार फिर शांति छा गई। श्रव्या को देखकर लग रहा था कि अब उसे दुनिया से कोई मतलब नहीं। वो अब उस floor को देखकर ही जाएगी।श्रव्या बोली -अब चाहे कुछ भी हो....मैं इस floor को देखकर ही जाऊंगी।धूप की हल्की किरणें शीशे से छनकर कमरे में पड़ रही हैं। हवा में सन्नाटा है , पर एक अजीब-सी मासूमियत भी। श्रव्या खिड़की के पास खड़ी है, आँखें बंद, हवा को महसूस करती हुई। उसके बाल चेहरे पर उड़ते हैं।बैकग्राउंड आवाज़ (श्रव्या के मन की) —ये खामोशी... कितनी सुकूनभरी है... जैसे कोई अपनी कहानी सुना रही हो...अचानक... पीछे से