Machho Bhoot

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रात का वह समय था जब नदी के किनारे की हवा भी डर से थम जाती थी। गाँव के बूढ़े कहते थे कि आधी रात के बाद उस घाट पर कदम रखना मौत को बुलाने जैसा है, लेकिन लालच इंसान से सब कुछ करवा देता है। उसी लालच में फँसकर हरि नाव लेकर उस सुनसान घाट पर पहुँच गया, जहाँ से कई मछुआरे कभी लौटकर नहीं आए थे।घाट के पास पहुँचते ही उसे एक अजीब सन्नाटा महसूस हुआ। पानी बिल्कुल स्थिर था, जैसे उसमें कोई जान ही न हो। दूर किनारे पर टूटी सीढ़ियों के पास कुछ दीपक जल रहे