261 Jamiil musamman saalim mufaa'ilaatun mufaa'ilaatun mufaa'ilaatun mufaa'ilaatun 12 122 12122 12122 12122 हमे ज़माना नहीं करे याद तो कोई बात ख़ास होगी मगर उसे आदमी की पहचान होगी जब बद-हवास होगी # तज़ुर्बा कहता है शेर उनको मिरे ये अच्छे नहीं लगे हैं मगर ये भी जानता हूँ ऐसी भी सोच मेरी क़यास होगी # ये दौड़ है ज़िन्दगी की लोगों ने फ़ायदा- लुफ़्त भी उठाया मगर निराशा नसीब चलते अपंग ज्यादा हताश होगी # लिखा है क़ुदरत ने पुस्तकों में तो एक वो दिन भी आएगा ही तज़ुर्बे तेरी शिक़ायते- शोहरतें सभी जब ख़लास होगी # वो