धूल किस्मत में

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221..   122 122 122 122 जो तुम देखती हो वो हम  देखते हैं खुदा की नुमाइश करम  देखते हैं # वजूद आज मुझ  सा नहीं है किसी का यहाँ लोग खुद को ही  कम देखते हैं # मुझे आजमाने चला  था ज़माना उसे दो बता कुछ  जनम देखते हैं # खुलासा हुआ समझो जब सादगी का नजर फेर के अब सनम देखते हैं # हूँ मै मुंतजिर जिन्दगी रूबरू हो चलो  खास बहके कदम  देखते हैं # सुशील यादव दुर्ग 7000226712     222..   Muzare.a musamman aKHrab makfuuf mahzuuf maf'uul faa'ilaat mufaa'iil faa'ilun 22121211221212 # अपने ही धुन