नई सुबहपटना से उठी "विश्वास विश्वविद्यालय" और "विश्वास दल" की रोशनी अब पूरी दुनिया में फैल चुकी थी। हर देश में लोग हथियारों की जगह किताबों की ओर बढ़ रहे थे। पृथ्वी सुबह बच्चों के बीच खड़ा था। उनकी हँसी और पढ़ाई की आवाज़ें उसे सुकून दे रही थीं। सनाया पास आई और बोली, “अब हमें इस रोशनी को स्थायी भविष्य में बदलना है। यही हमारी असली जिम्मेदारी है।” पृथ्वी ने दृढ़ता से कहा, “हाँ। अब विश्वास का स्थायी भविष्य बनाना होगा।” ---शिक्षा का स्थायी विस्तारटीम ने शिक्षा अभियान को स्थायी बनाने का निर्णय लिया। - दिल्ली में शिक्षा को अनिवार्य किया गया। - मुंबई में