मेरा प्यार - 14

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​​एपिसोड 14: ज़मीर की कंगाली और लहू का दान​अस्पताल के गलियारे में अज़ीम और कादिर, डॉक्टर के पीछे-पीछे तेज़ी से ब्लड डोनेशन रूम की तरफ बढ़ रहे थे। अज़ीम का चेहरा उम्मीद से चमक रहा था, उसे लग रहा था कि अब ज़ोया साहिबा बच जाएंगी। लेकिन ठीक वहीं, गलियारे के दूसरे कोने में खड़े मिस्टर खन्ना के दिमाग में ज़हर अभी भी उबल रहा था।​मिस्टर खन्ना ने अपनी महंगी घड़ी की तरफ देखा और फिर नफरत भरी नज़रों से कादिर और अज़ीम को जाते हुए देखा। उनके मन में किसी के प्रति कृतज्ञता (gratitude) नहीं थी, बल्कि एक खौफनाक