बाघ के पंजे

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बाघ के पंजे   कमल चोपड़ा         ​सजग के माँ-बाप उसे कभी किसी काम के लिये नहीं टोकते थे। सजग भी ऐसा कुछ भी नहीं करता था जिसके लिये उसे पछताना पड़े या माँ-बाप के सामने शर्मिन्दा होना पड़े।​रोजाना की तरह स्कूल से लौटने के बाद उसने खाना खाया, कुछ देर आराम किया, फिर उठकर खेलने के लिये निकल गया। मुहल्ले के बीचों-बीच एक खाली ग्राउण्ड था जहाँ रोजाना शाम को कुछ लड़के क्रिकेट खेलते।​ग्राउण्ड के चारों तरफ दो-मंजिला, तीन-मंजिला मकान थे। सजग का क्रिकेट खेलने का मन होता तो वह मन मसोस कर रह जाता। वह रोजाना शाम