मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 37

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भूतिया हवेली का रहस्य पटना के बाहरी इलाके में, गंगा नदी के किनारे एक पुरानी हवेली खड़ी थी। लोग इसे 'काली हवेली' कहते थे। सालों से खाली पड़ी, दीवारें काली पड़ चुकीं, खिड़कियां टूटी हुईं। रात के अंधेरे में वहां से आने वाली आवाजें—कभी हंसी, कभी रोना—गांव वालों को डराती रहतीं। लेकिन शहर से आया एक युवा पत्रकार, राहुल, को यह सब झूठ लगता था। वह एक ब्लॉग चलाता था, जहां सच्ची घटनाओं पर कहानियां लिखता। 'भूत-प्रेत सब अंधविश्वास है,' वह कहता। एक दिन, पुरानी खबरों में काली हवेली का जिक्र मिला—सत्तर साल पहले एक अमीर जमींदार की बेटी गायब