यह विराट सृष्टि अनंत रूपों, रंगों और जीवों से परिपूर्ण है। कहीं नभ में उड़ते पक्षी हैं, कहीं धरती पर रेंगते कीट-पतंगे, कहीं जल में तैरती मछलियाँ और कहीं जंगलों में विचरते पशु। परंतु इन सबके बीच यदि कोई जीवन सर्वाधिक सौभाग्यशाली है, तो वह है मानव जीवन। यह केवल शरीर नहीं, बल्कि चेतना, विचार, संवेदना और आत्मबोध का अद्वितीय संगम है। मनुष्य को मिला यह जीवन ईश्वर की ओर से मिला हुआ एक अनुपम प्रसाद है। इसलिए इस जीवन के प्रति कृतज्ञता का भाव रखना हमारा नैतिक कर्तव्य है। कहा भी गया है— “मानुष तन अमोल है, यह अवसर