इश्क और इस्तीफा - 8

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विराज के 'इस्तीफे' शब्द ने कमरे में जैसे समय को रोक दिया था। काव्या की आँखों में आँसू थे, पर वह वहां से हिली नहीं। 'मामा जी' के नाम से संबोधित वह व्यक्ति, जो नफरत और शराब के नशे में चूर था, जोर-जोर से हंसने लगा।"इस्तीफा? किससे इस्तीफा दे रहे हो विराज? अपनी यादों से? या उस गुनाह से जिसे तुम इस आलीशान कोठी की दीवारों में दफन करना चाहते हो?" मामा जी ने हाथ में पकड़े कांच के नुकीले टुकड़े को हवा में लहराते हुए कहा।विराज ने काव्या का हाथ मजबूती से पकड़ा और उसे धीरे से सीढ़ियों की