भाग 1: भीगी सड़क और एक अधूरी शुरुआतमुंबई की बारिश का कोई भरोसा नहीं होता। कभी यह सुकून देती है, तो कभी ज़िंदगी की रफ्तार थाम देती है। उस रात भी कुछ ऐसा ही था। आसमान से पानी की चादर गिर रही थी और शहर की चकाचौंध लाइटें गीली सड़कों पर बिखरकर एक जादुई सा अहसास पैदा कर रही थीं।कबीर अपने ऑफिस के बाहर खड़ा घड़ी देख रहा था। रात के 11 बज चुके थे। उसकी आँखों में थकान थी और हाथ में एक भारी लैपटॉप बैग। वह स्वभाव से बहुत ही व्यवस्थित इंसान था। उसकी दुनिया एक्सेल शीट्स, डेडलाइन्स