शून्यप्रस्थ: एक अंतहीन महागाथा - 1

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अध्याय 1: सुनहरी राख का सवेरा​शून्य-प्रस्थ के क्षितिज पर जब सूर्य अपनी पहली किरणें बिखेरता है, तो वह केवल प्रकाश नहीं, बल्कि एक जादुई उत्सव होता है। यहाँ का प्रकाश हल्का केसरिया है, जो हवा में तैरते बारीक स्वर्ण-कणों से टकराकर पूरे आकाश को एक चमकते हुए रत्न में बदल देता है। यहाँ समय की धारा भी अलग ही वेग से बहती है; निवासियों के लिए बीस चक्रों का समय केवल एक ऋतु बीतने जैसा है। यौवन यहाँ सहस्रों वर्षों तक स्थिर रहता है, मानो आयु स्वयं इन लोगों के तेज से थम गई हो। गगनचुंबी पर्वतों से गिरते नीलमणि