एपिसोड 13: बेअसर दौलत और उम्मीद का कतराअस्पताल के उस कमरे में मौत का साया गहराता जा रहा था। अज़ीम फर्श पर सुन्न होकर बैठा था, मानों उसका जिस्म तो यहाँ था पर रूह ज़ोया के साथ कहीं दूर जा चुकी थी। ज़ारा की आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे। उसने मुड़कर दरवाज़े पर खड़े अपने डैड की तरफ देखा, जिनकी गर्दन आज पहली बार झुकी हुई थी।"देख लीजिए मिस्टर खन्ना!" ज़ारा की आवाज़ में ज़हर और दर्द का मिला-जुला शोर था। "क्या करेंगे आप अपनी इस बेहिसाब दौलत का? आज आपकी रईसी एक बेटी की साँसें तक नहीं