तेरे मेरे दरमियान - 83

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विकास :- छी छी छी ... आदित्य , बेचारा दैखो कैसी शकल हो गयी है बेचारे की । क्या - क्या सौच के रखा था और दैखो क्या हो गया । तु जानवी की दौलत को हड़पना चाहता था ना पर बेचारा तोरी ऐसी किस्मत कहा । आज तुम्हारा डिवोर्स और कल मेरी और जानवी की शादी । दैखो मैने कार्ड भी बना लिया है , और डिवोर्स को बाद येसा पहला इनविटेशन तुम्हारे लिए । तु्हें क्या लगता था के तुम ये अच्छा बनने का ढोंग करके जानवी का दिल जीत लोगे और उसकी दौलत पर कब्जा कर लोगे