Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 12 — इन्साफ़

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सुबह का समय था। एक दुबला-पतला युवक थाने की ओर जा रहा था। हाथ में स्टील की केतली और छह चाय से भरे काँच के गिलास। रोज़ का काम। रोज़ की राह। मोड़ पर कोई दीवार से अलग हुआ। अनीश। लड़का चौंका, फिर मुस्कुराया — “अरे अनीश सर!” अनीश ने उँगली होंठों पर रखी। पास बुलाया। कान में कुछ फुसफुसाया। लड़के का चेहरा उतर गया। “सर… ये…?” अनीश ने बिना जवाब दिए नोटों की मोटी गड्डी उसकी शर्ट की जेब में ठूँस दी। “कुछ नहीं होगा। बस ये वाला कप… ठीक जगह पहुँचना चाहिए। और मिलेंगे।” उसने जेब से एक