जोगी नीचे चला गया था बाइक निकालने। वर्षा ने जल्दी-जल्दी सामान समेटा। एक बार कमरे को देखा। बिस्तर। कुर्सी पर सूखे कपड़े। ठंडी इस्त्री। फिर बिना रुके बाहर निकल गई। नीचे बरामदे में जोगी बाइक के पास झुका था। एक छोटे पंप से टायर में हवा भर रहा था। वह उठ खड़ा हुआ। “किसी ने टायर की हवा निकाल दी।” उसने जेब से मुचड़ा हुआ कागज़ निकाला। “ये एक्सहॉस्ट में फँसा था।” वर्षा ने कागज़ खोला। अख़बार की कटिंग्स से काटे गए अक्षर। बेमेल। साफ़। सुनियोजित। “जिन रास्तों पे चल रहे हो वहाँ सिर्फ़ मौत मिलेगी। लौट जाओ।” वर्षा ने