चुपके-चुपके आऊँगा - भाग 4

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लेखक -एसटीडी मौर्य ️कटनी मध्य प्रदेश (भारत )जैसा कि मैंने पिछले भाग में बताया था, रात को जन्मदिन का कार्यक्रम बहुत खुशी से पूरा हुआ था। हम सबने मिलकर केक काटा, खाना खाया और देर रात तक बातें करते रहे। उसी रात मैं और प्रियांशी छत की बालकनी में बैठकर अपने दिल की बातें भी कर रहे थे, लेकिन अचानक उनके पापा आ गए थे। उस समय हम दोनों थोड़ा डर भी गए थे, क्योंकि हमें लगा था कि शायद उन्होंने हमें देख लिया है।अब कहानी आगे वहीं से शुरू होती है…मैं और प्रियांशी वहीं रह गए और एक-दूसरे से