गोरी मेम

  • 1.5k
  • 131

        वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानी  जब संडीला के नवाब हैदर अली ने अपने इकलौते बेटे रियासत को पढ़ने के लिए विलायत भेजने का मन बनाया तो बेगम साहिबा ने तंज़ कसा -"जिस तरह लोग संडीला से "लड्डू" साथ लाते है उसी तरह विलायत से गोरी मेम साथ लाते है।" नवाब साहब हंस पड़े- "हमारी ज़िंदगी तवे की रोटी खाते-खाते निकल गई, बेटा नान खाएगा।" बेगम ने पलटवार किया- "दुआ करो, शराब पीने वाली न हो।" मज़ाक में कहीं बात उनके दिल को छू गई। उन्होंने अपने पुराने दोस्त रहमत चचा से मशवरा किया। चचा ने दाढ़ी सहलाते हुए कहा-"गले में खूंटा डाल दो।" "खूंटा?"  "विलायत जाने से