शहर के किनारे एक विशाल अनाज का गोदाम था।दिन में वहाँ सन्नाटा पसरा रहता, पर रात होते ही वहाँ एक अलग ही दुनिया जाग उठती । गोदाम में गेहूँ, चावल, गुड़, सूखा दूध और मक्का के बड़े-बड़े ढेर लगे रहते थे।रात होते ही चूहे अपने-अपने बिलों से निकल आते।कोई बोरे में सुराख करता,कोई दाने खींचकर अपने बिल में ले जाता,तो कोई अपने बच्चों के साथ खेलता-कूदता। पूरा गोदाम मानो चूहों का एक छोटा-सा नगर था।लेकिन उस नगर पर हमेशा एक भयानक छाया मंडराती रहती थी।वहाँ एक बड़ी काली बिल्ली रहती थी—जिसे सब डरते-डरते “बिल्ली मामू” कहते थे।बिल्ली मामू बड़ी धूर्त थी।वह