एपिसोड 11: ज़ारा का हुक्म और अज़ीम की तलाशज़ोया की हालत और उसकी आखिरी वसीयत ने ज़ारा के अंदर के गुस्से को एक मिशन में बदल दिया था। उसने अपनी आँखों के आँसू पोंछे और कमरे से बाहर निकलकर सीधे राणा (सिक्योरिटी हेड) को फोन लगाया।राणा ने कांपते हाथों से फोन उठाया, "जी... ज़ारा मैम?""राणा, कान खोलकर सुन लो," ज़ारा की आवाज़ बर्फीली और घातक थी। "तुमने और मेरे डैड ने मिलकर जिस अज़ीम को तबाह किया है, जिसकी दुकान तुमने मिट्टी में मिला दी... मुझे वह लड़का हर हाल में चाहिए। अभी के अभी! शहर का कोना-कोना छान मारो,