भाग 2: सुरों और शब्दों का सफर' रिदम कैफे' की उस बारिश वाली शाम के बाद शहर का मिजाज बदल सा गया था। आर्यन, जो अपनी इमारतों के नक्शों में खोया रहता था, अब अपनी घड़ी की सुइयों को शाम के पाँच बजने का इंतज़ार करते हुए देखता था। इशानी के उन चंद शब्दों ने आर्यन की दुनिया की खामोशी को एक ऐसी हलचल में बदल दिया था, जिसे वह खुद भी पूरी तरह समझ नहीं पा रहा था।अगले कुछ हफ़्तों तक, उनकी मुलाकातें एक नियम सी बन गईं। हर शाम, जब सूरज ढलने लगता और आसमान में गुलाबी-नारंगी