पटना के बाहरी इलाके में, जहाँ गंगा की लहरें खामोशी से बहती हैं, वहाँ एक विशालकाय और जर्जर इमारत खड़ी थी। इसे लोग 'काली हवेली' के नाम से जानते थे। इस हवेली की दीवारें काली पड़ चुकी थीं और इसके झरोखों से झांकता अंधेरा राहगीरों के दिल में दहशत भर देता था। सालों से यह हवेली वीरान थी, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना था कि यहाँ सन्नाटा कभी चुप नहीं रहता। रात के सन्नाटे में यहाँ से पायल की छनछन, सिसकियों और भारी कदमों की आवाजें आती थीं।लालच और चुनौतीराजू, जो पटना शहर का एक उभरता हुआ और जिद्दी रियल