महाराणा प्रताप - 1

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साल 1540 की एक ठंडी सुबह। अरावली की ऊँची पहाड़ियों के बीच स्थित कुंभलगढ़ किला अपने विशाल द्वारों और मजबूत दीवारों के साथ एक नए इतिहास का साक्षी बनने वाला था। किले के भीतर हलचल थी, सैनिकों की चौकसी बढ़ा दी गई थी और महल के अंदर रानियों और दासियों की भागदौड़ चल रही थी।महारानी के कक्ष के बाहर कई दासियाँ खड़ी थीं। अंदर से कभी दर्द की आवाज आती, तो कभी दाई का आश्वासन सुनाई देता। आज मेवाड़ के राजा उदय सिंह द्वितीय की पहली रानी जयवंता बाई संतान को जन्म देने वाली थीं। पूरे किले में प्रार्थनाएँ हो