Chapter 5रात के सन्नाटे में काव्या की आँखों से नींद कोसों दूर थी। वह फोटो रह-रहकर उसके सामने आ रही थी—विराज मल्होत्रा, जिसके चेहरे पर आज पत्थर जैसी खामोशी रहती है, उस तस्वीर में एक खिलखिलाते हुए युवा के रूप में था। उसके साथ वाली महिला और वो छोटी बच्ची कौन थी? क्या वही उस बंद कमरे का राज़ थे?अगली सुबह काव्या ने तय किया कि वह अब सीधे सवाल नहीं करेगी, बल्कि विराज के व्यवहार को गहराई से समझेगी। वह नाश्ते की मेज पर पहुँची, जहाँ विराज हमेशा