अध्याय 14: युद्ध की तैयारी और लौरा का संकल्पजैसे ही कन्या गुरुकुल की संदेशवाहक वापस गई, पूरे विशाल गुरुकुल का शांत वातावरण जैसे किसी सक्रिय ज्वालामुखी की तरह धधकने लगा। जो छात्र अब तक केवल रुद्र और विक्रांत के मुकाबले की चर्चा कर रहे थे, अब उनकी आँखों में एक नया और अनजाना कौतूहल था। हर गलियारे में एक ही बात हो रही थी—'क्या कन्या गुरुकुल की छात्राएं सच में हमें चुनौती देंगी?'लौरा का युद्धाभ्यासउधर, दक्षिण परिसर (लड़कियों के गुरुकुल) में शांति के स्थान पर शस्त्रों की तीखी खनक गूँज रही थी। आचार्या वसुंधरा के कड़े निर्देशन में वहाँ अब