में और मेरे अहसास - 145

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प्रेम विवाह  प्रेम विवाह का बंधन निराला होता हैं l दिल से जुड़ा रिसता सुहाना होता हैं ll   धड़कनों के तार जुड़े है एकदूसरे से l प्यार की रस्मों को निभाना होता हैं ll   मुसलसल रिसते को मुकम्मल कर l इश्क़ ए मिजाजी दिखाना होता हैं ll   दिवाने मोहब्बत का वास्ता है कि l जज़्बातों का यकी दिलाना होता हैं ll   जिसकी चाहतों में जुडे हों उसकी l आगोश में ख़ुद को मिटाना होता हैं ll १६-२-२०२६  संकट दिल की उदासी को तुझसे छुपाएँ कैसे? ठीक हुँ खुद को दिलासा दिलाएँ कैसे?    तसव्वुर तो बहुत