प्रेम विवाह प्रेम विवाह का बंधन निराला होता हैं l दिल से जुड़ा रिसता सुहाना होता हैं ll धड़कनों के तार जुड़े है एकदूसरे से l प्यार की रस्मों को निभाना होता हैं ll मुसलसल रिसते को मुकम्मल कर l इश्क़ ए मिजाजी दिखाना होता हैं ll दिवाने मोहब्बत का वास्ता है कि l जज़्बातों का यकी दिलाना होता हैं ll जिसकी चाहतों में जुडे हों उसकी l आगोश में ख़ुद को मिटाना होता हैं ll १६-२-२०२६ संकट दिल की उदासी को तुझसे छुपाएँ कैसे? ठीक हुँ खुद को दिलासा दिलाएँ कैसे? तसव्वुर तो बहुत