मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 31

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अंधेरी घाटी का बुलावा: एक खौफनाक दास्तानहिमालय की तलहटी में बसा 'रुद्रपुर' एक ऐसा गाँव था जहाँ सूरज की रोशनी बाकी दुनिया से पहले चली जाती थी। ऊँचे-ऊँचे चीड़ के पेड़ों के बीच बसी यह बस्ती शाम होते ही सन्नाटे की चादर ओढ़ लेती थी। गाँव के किनारे पर एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग 'नीली कोठी' कहते थे। गाँव वालों का मानना था कि उस कोठी की दरो-दीवारों में आज भी उन लोगों की चीखें कैद हैं, जो कभी वहाँ से वापस नहीं आए।शहर से आए तीन दोस्तअयान, समीर और काव्या शहर की भागदौड़ से दूर कुछ रोमांच की