सम्राट अशोक : तलवार, युद्ध और धर्म - 2

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जब मैं उज्जैन में शासन कर रहा था, तब मेरे जीवन में एक ऐसा समाचार आया जिसने सब कुछ बदल दिया।मेरे पिता, महान सम्राट बिंदुसार, गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे। यह खबर जैसे ही पूरे मौर्य साम्राज्य में फैली, दरबार में हलचल मच गई।सिंहासन अब खाली होने वाला था और जब सिंहासन खाली होता है, तो केवल एक ही चीज़ जन्म लेती है  संघर्ष।मेरे कई भाई थे, और उनमें सबसे बड़ा था सुसीम वह खुद को सिंहासन का असली उत्तराधिकारी मानता था दरबार के कई मंत्री और सेनापति भी उसी के पक्ष में थे।लेकिन कुछ लोग ऐसे भी