भूमिका अधिकता का भ्रम — संतुलन का धर्मVedanta 2.0 Life मनुष्य की सबसे बड़ी भूल यह है कि उसने जीवन को अधिकता से जोड़ दिया है।उसे लगता है — जितना अधिक विस्तार होगा, उतना ही अधिक सुख होगा।अधिक धन, अधिक साधन, अधिक उपलब्धियाँ, अधिक संबंध — यही जीवन की सफलता समझी जाने लगी है। लेकिन यदि हम प्रकृति को ध्यान से देखें, तो एक अलग सत्य दिखाई देता है।प्रकृति कहीं भी अधिकता को स्वीकार नहीं करती।वह संतुलन पर टिकी है। जब संतुलन रहता है, तब जीवन सहज चलता है।और जब अधिकता बढ़ती है,