झाड़ू वाली MBA

  • 246
  • 77

झाड़ू वाली MBA(वैकल्पिक शीर्षक: “पहचान जो छुपी रह गई”, “गोल्ड मेडल और धूल”, “काव्या का सच”)सेठ राजेश्वर के केबिन में सन्नाटा पसरा हुआ था।सामने खड़ी काव्या के हाथ काँप रहे थे, और मेज पर रखा उसका पुराना, मुड़ा-तुड़ा आईडी कार्ड जैसे उसकी पूरी कहानी कह रहा था।राजेश्वर ने कार्ड उठाया।उस पर साफ लिखा था Master of Business Administration  Gold Medalist.उन्होंने भौंहें सिकोड़ लीं।“अगर तुम सच कह रही हो… तो यहाँ झाड़ू क्यों लगा रही हो?”आवाज़ अब पहले जैसी कठोर नहीं थी, पर संदेह अभी भी मौजूद था।काव्या की आँखें भर आईं।“साहब… मेरे पापा की अचानक मौत हो गई थी। उन पर