भाग 1: तन्हाई की शामज़ैनब उर्फ़ ज़ीनत अपने कमरे की खिड़की से बाहर देख रही थी। शाम ढल रही थी और आसमान पर केसरिया रंग छा रहा था। उसके माँ-बाबा को गए दो साल हो गए थे। एक सड़क हादसे ने उसकी ज़िंदगी को तहस-नहस कर दिया था। उसके बाद से वह अकेली थी इस दुनिया में। चाचा ने उसे अपने साथ रखा तो था, लेकिन चाची की नज़रों में वह हमेशा बोझ थी।"ज़ीनत, खाना बना लिया?" चाची की तेज़ आवाज़ ने उसकी तन्हाई तोड़ी।"हाँ चाची, बस थोड़ी देर में," ज़ीनत ने आवाज़ दी और जल्दी से रसोई की तरफ