रूहों का सौदा - 13

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​अध्याय 13: छलावा और वास्तविक चुनौती​मैदान में धूल का गुबार अब शांत हो रहा था। रुद्र ने अपनी तलवार की नोक विक्रांत के गले पर टिका दी थी। पूरा प्रांगण तालियों की गूँज और 'रुद्र' के नाम के जयकारों से भर गया था। रुद्र की साँसें फूल रही थीं, लेकिन उसकी आँखों में जीत का संतोष था। उसे लगा कि उसने अपना लक्ष्य पा लिया है।​महागुरु की गरजती हुई आवाज़ पूरे मैदान में गूँज गई। हाथ के एक इशारे से उन्होंने मुकाबले को वहीं रोक दिया। रुद्र और विक्रांत, दोनों ही हाफते हुए रुक गए। सबको लगा कि शायद रुद्र