अध्याय 2 पिंजरे में पहली रातकाव्या ने अपने हाथ में पकड़े बैग को ज़ोर से भींचा। उसके सामने विराज मल्होत्रा का आलीशान बंगला 'मल्होत्रा मेंशन' खड़ा था। यह घर जितना भव्य था, उतना ही ठंडा और खामोश भी।"अंदर आने के लिए क्या मुझे रेड कारपेट बिछाना पड़ेगा?" विराज की भारी आवाज़ उसके पीछे से आई। वह अभी-अभी अपनी काली कार से उतरा था।काव्या ने पलटकर उसे देखा। वह अब भी उसी सख्त अंदाज़ में था। "मैं यहाँ सिर्फ काम के लिए आई हूँ, सर।