मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 28

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हवेली का अंतिम पहर: आधी रात का सन्नाटाशहर की भागदौड़ से दूर, घने जंगलों के बीच बसी 'नीलगिरी हवेली' के बारे में कई कहानियाँ मशहूर थीं। गाँव वाले कहते थे कि सूरज ढलने के बाद उस हवेली की दीवारें सांस लेने लगती हैं। आर्यन, जो एक मशहूर घोस्ट-हंटर (भूतिया रहस्यों को सुलझाने वाला) और लेखक था, इन बातों पर यकीन नहीं करता था। उसे अपनी नई किताब के लिए एक ठोस कहानी चाहिए थी, और नीलगिरी हवेली से बेहतर जगह क्या हो सकती थी?आगमन: एक अशुभ शुरुआतजब आर्यन अपनी पुरानी जीप से हवेली के पास पहुँचा, तो शाम के छह