Monalisa smile part 2रात का सन्नाटा पूरे मानसिक अस्पताल पर गहरा चुका था। बारिश की तेज़ बौछारें खिड़कियों से टकराकर डरावनी ध्वनि पैदा कर रही थीं, और हर कुछ मिनटों में कड़कती बिजली की सफेद चमक, गलियारों की परछाइयों को अस्थिर कर रही थी।सुनीता, अस्पताल की नाइट शिफ्ट कर्मचारी, अपने रूटीन चक्कर पर थी। अंधेरे गलियारों में जलती-मिटती ट्यूबलाइट की झपकती रोशनी माहौल को और भी भयावह बना रही थी। कुछ मरीज गहरी नींद में थे, तो कुछ बड़बड़ाते हुए अपने बिस्तरों पर बैठे झूल रहे थे। दूर किसी कोने में एक बूढ़ी महिला धीमी आवाज़ में कुछ मंत्र बुदबुदा